उदयपुर। दिव्यांगजनों के जीवन में उपचार, पुनर्वास और सेवा से किस तरह बदलाव आ रहा है, इसे करीब से जानने के लिए रविवार को विभिन्न राज्यों से आए समाजसेवियों ने नारायण सेवा संस्थान के वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी का अवलोकन किया। यहां आयोजित स्नेह मिलन समारोह में अतिथियों ने संस्थान के सेवा प्रकल्पों की जानकारी ली और उपचाररत दिव्यांगजनों से संवाद कर उनके संघर्ष, आत्मनिर्भर बनने की उम्मीदों और जीवन में आ रहे बदलावों को समझा। मरीजों की परिस्थितियों और उनके जीवन में सेवा के प्रभाव को देखकर अतिथि भावुक हो गए।
समारोह का शुभारंभ संस्थान के संस्थापक एवं चेयरमैन पद्मश्री कैलाश मानव, सह-संस्थापिका कमला देवी अग्रवाल और निदेशक पलक अग्रवाल ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम में गुरुग्राम से आनंद प्रकाश, दिल्ली से गोपीचंद सहरावत, नागपुर से अर्चना गुप्ता, आनंद से भूपेंद्र चतुरभाई पटेल और अहमदाबाद से सुनील जोशी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
सेवा कार्यों की जानकारी लेकर देखीं पुनर्वास सुविधाएं
वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी के भ्रमण के दौरान निदेशक पलक अग्रवाल ने अतिथियों को संस्थान के वर्तमान सेवा प्रकल्पों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाओं से अवगत कराया। अतिथियों ने उपचाररत दिव्यांगजनों से बातचीत कर उनकी समस्याओं, संघर्ष और भविष्य की उम्मीदों को जाना। इस संवाद ने उन्हें दिव्यांगजनों के सामने आने वाली चुनौतियों और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को समझने का अवसर दिया।
दानदाताओं के सहयोग से आगे बढ़ रही सेवा : कैलाश मानव
संस्थान के संस्थापक एवं चेयरमैन पद्मश्री कैलाश मानव ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान दानदाताओं के सहयोग और दिव्यांगजनों के विश्वास के बल पर निरंतर सेवा कार्य कर रहा है। सहयोग की यही भावना संस्थान को सेवा के नए आयाम स्थापित करने की शक्ति देती है।
विशिष्ट अतिथि भूपेंद्र चतुरभाई पटेल ने संस्थान की ओर से किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की और भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। स्नेह मिलन समारोह का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों को संस्थान के सेवा कार्यों से जोड़ना और दिव्यांगजनों के उपचार एवं पुनर्वास के प्रयासों से रूबरू कराना रहा।