उदयपुर। आश्विन मास की शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर झीलों की नगरी के मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दर्शन होंगे। चंद्रमा की अमृतमयी धवल किरणों के बीच प्रमुख देवालयों में ठाकुरजी को श्वेत जरी वस्त्र, मुकुट और स्वर्णाभूषण धारण कराए जाएंगे। प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत सुबह 5:30 बजे मंगला आरती से होगी। पुजारी विनोद के अनुसार, भगवान को पंचामृत स्नान के उपरांत श्वेत जरी की पोशाक और स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाएंगे। रात 8:30 बजे ठाकुरजी को चांदनी की रोशनी में विराजित कर ककड़ी, चपड़ा और 501 लीटर दूध से तैयार विशेष खीर का भोग लगाया जाएगा। वहीं घंटाघर स्थित अन्नपूर्णा माता मंदिर में 1100 लीटर दूध से महाप्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित होगा। श्रीनाथजी की हवेली में ठाकुरजी माणिक कोठे में विराजेंगे और 'महारास' भाव के दर्शन होंगे। इसके अतिरिक्त चांदपोल बाहर स्थित श्री संकट मोचन बालाजी मंदिर में तेल रुद्राभिषेक, 200 किलो दूध का भोग, सुंदरकांड पाठ, महाआरती और भव्य आतिशबाजी का आयोजन रखा गया है।